देवास। युवक ने घर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया, युवक को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लेकर आए जहां उसका उपचार जारी है। युवक के पिता ने बहू पर आरोप लगाते हुए बताया कि दोनों पति-पत्नी के बीच तलाक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। तलाक के लिए बहू 50 लाख रुपयों की मांग कर रही है। इससे प्रताडि़त होकर उसके बेटे ने जहरीला पदार्थ खा लिया। मामले को लेकर सिविल लाइन पुलिस ने प्रकरण को जांच में लिया है।
जानकारी के अनुसार देवराज पिता रतनलाल परमार उम्र 28 वर्ष निवासी सिद्धार्थ नगर इटावा उज्जैन रोड ने आज सुबह घर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। युवक के पिता रतनलाल ने बताया कि रात को खाना खाकर देवराज उसके कमरे में सो गया था। सुबह उठाने गए तो वह उठा नहीं दरवाजा खटखटाया लेकिन नहीं खोला। उसके बाद दरवाजा तोडक़र देखा तो वह नीचे गिरा हुआ था। उसे तुरंत जिला चिकित्सालय लेकर आए जहां उसका उपचार जारी है। उन्होनें बताया कि देवराज वर्षों से कुटुंब न्यायालय में चपरासी के पद पर कार्यरत था। उसकी पत्नी और उसके बीच तलाक का प्रकरण करीब 8 वर्ष से चल रहा है। इसको देखते हुए उसे नौकरी से हटा दिया। पिता ने बताया कि देवराज की जेब से एक सोसाइट नोट भी मिला है। पिता ने बताया कि देवराज की शादी करीब 11 वर्ष पूर्व ग्राम जिवाजीखेड़ा हुई थी। इनका एक बेटा है जो बहू के साथ ही रहता है। बहू ने तलाक के लिए 50 लाख रुपए की मांग कि है। उन्होनें बताया कि देवराज ने जहरीला पदार्थ खाने के पूर्व एक सोसाइट नोट लिखा साथ ही एक विडियो भी बनाया है।

विडियो जारी कर कहा : लडक़े आए दिन मर रहे, लड़कियां आगे बढ़ती जा रही
मैं देवराज परमार देवास से आप सभी लोगों को यह बात बताना चाहता हूं कि मैं कोर्ट की लड़ाई लड़ते-लड़ते अपनी पत्नी से हार चुका हूं। मैं 6 वर्ष से परेशान हूं। मेरी पत्नी 50 लाख रुपए मुझसे मांग रही है। मेरे पास कोई प्रॉपर्टी नहीं है एक घर है वह भी पट्टे का है। एक नौकरी थी उससे भी मेरा हाथ झूठे-झूठे केस लगवाकर छुड़वा दिया उसने। मैं सभी से हाथ जोडक़र निवेदन करता हूं मेरे मरने के बाद जिस किसी के पास यह विडियो जाए वो मुझे न्याय दिलाने की कोशिश कर मेरे मरने के बाद माता-पिता को न्याय दिलाएं। मैं यह कहना चाहता हूं कि मेरे मरने के बाद सिर्फ मेरी पत्नी उसके पिताजी, भाई व फूफाजी अर्जुन चौहान इस मौत के जिम्मेदार रहेंगे। मैं बहुत परेशान हो गया था। इस कारण से यह करने जा रहा हूं। मैं गरीब हूं मेरे माता-पिता का एक ही लडक़ा हूं। मेरे पास 50 लाख रुपए है ही नहीं। मेरा न्याय पालिका से निवेदन है कि यह केस बदला जाए क्योंकि लडक़े आए दिन मर रहे हैं। लड़कियां आगे बढ़ती जा रही है। मेरा हाथ जोडक़र न्याय प्रणाली से निवेदन है कि यह बदला जाए। मैं कब तक परेशान रहूं कब तक लड़ता रहूं मेरे घर रोज पुलिस आकर गिरफ्तार कर जेल भेजने का बोल रही है। मुझे जेल भी भेज दिया था जेल भी काटकर आया हूं। जेल काटकर जो इंसान बाहर आता है उसे बाहर के लोग क्रूरता की दृष्टि से देखते हैं। मुझे न्याय दिलाया जाए।
5 पेजों का लिखा का सोसाइट नोट
जहरीला पदार्थ पीने वाले देवराज के पास से एक सोसाइट नोट भी मिला जिसमें लिखा था मेरा नाम देवराज परमार पिता रतन में अपने पूरे होशों हवास में यह नोट लिख रहा हूं। मैं मेरी पत्नी संतोष बाई उसके पिता लालसिंह व उसके तीनो भाई और उसके फूफाजी द्वारा पिछले 6 साल से परेशान हो गया। आज मुझे इन सभी के कारण अपनी मौत को स्वीकार करना पड़ रहा है। यह लोग मुझे हमेशा से टार्चर करते आ रहे है। मुझ पर 50 लाख रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा है मैने अपनी पत्नी को समझाने की कोशिश की लेकिन वह अपने पिता और अपने फूफाजी कि बात में आकर कहती है तुम 50 लाख रुपए दे दो तो में तुम्हें तलाक दे देती हूं। पत्नी ने मेरे ऊपर आरोप लगाया कि मेरे पिताजी की कालर पकड़ी मेरे साथ मारपीट की, सिविल लाईन थाने पर ऐसा बताया गया। उसके बाद जब इन्हें मेडिकल करवाने का बोला था इन्होंने मना कर दिया। उसके बाद इन्होंने मेरे खिलाफ कोर्ट में केस लगाया और बताया कि हमारी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। मेरे ऊपर आरोप लगाकर मेरी नौकरी से भी मुझे घर बैठा दिया गया। मेरी नौकरी जाने के बाद में टूट चुका हंू। उसके बाद भी इन्होंने पीछा नहींं छोड़ा। फिर इन्होंने मुझे जेल पहुंचाया। मेरे बुजूर्ग माता-पिता ने 40 हजार मेरी दीदी से लेकर मेरी पत्नी को दिए। जेल गया तब से मेरा परिवार मेरे दोस्त गलत नजर से देखने लगे। मुझे लगा की जेल जाना अपने जीवन में नरक देखने के बराबर है। उसके बाद मेरी पत्नी ने फिर से वारंट निकलवा दिया। अब मुझे मरना पड़ेगा। मेरी मौत की जिम्मेदार सिर्फ मेरी पत्नी और उसके पिता व उसके फूफाजी है जिन्होंने मुझे बहुत परेशान कर दिया। मैं परिवार का इकलोता पुत्र हूं और माता-पिता से कहना चाहता हूं की तुम हार मत मानना। मैंने हार मान ली, और मुझे हमारे देश के प्रधानमंत्री और सीएम जी से भी कहना है कि हमारे देश की न्यायप्रणाली को सुधारो वरना नितिन पडिय़ार और कई हमारे जैसे लोग घुट-घुट कर आत्महत्या करेंगे। मुझे इंसाफ दिलवाया जाए और मेरी पत्नी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। जिससे किसी का हंसता खेलता परिवार बर्बाद नहीं हो।