बुजुर्ग ने खेत के समीप पेड़ पर लटककर व युवक ने रसोई घर में लगाई फांसी……..! -खेत पर गए थे बुजुर्ग, देर शाम तक नहीं लौटे तो परिजन पहुंचे खेत पर………!

देवास। जिले के ग्राम सिरोल्या में एक बुजुर्ग ने अपने खेत के समीप पेड़ पर लटककर फांसी लगाकर अज्ञात कारणों से आत्महत्या कर ली। वहीं शहर के शंकरनगर में एक युवक ने रसोईघर में फांसी लगा ली थी। दोनों मृतकों का गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिए गए। मामले को लेकर पुलिस ने मर्ग कायम कर प्रकरण को जांच में लिया है।


जानकारी के अनुसार प्रकाश पिता नाथूलाल मंडलोई उम्र 65 वर्ष निवासी ग्राम सिरोल्या बुधवार शाम को प्रतिदिन की तरह खेत पर गए थे। प्रकाश के मोबाइल पर फोन लगाया लेकिन उन्होनें फोन नहीं उठाया था। देर शाम तक घर नहीं लौटे तो परिजन उन्हें ढूंढते हुए खेत पर गए वहां पेड़ पर फांसी लगाकर लटके हुए दिखे। परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को फंदे से उतारा व जिला चिकित्सालय पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मामले को लेकर बरोठा पुलिस ने प्रकरण में जांच शुरु कर दी है। वहीं दूसरे मामले में जितेंद्र पिता किशनलाल पोलाय निवासी ग्राम दुधलाई हाल मुकाम शंकर नगर ने बुधवार रात को अज्ञात कारणों से रसोई घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मामले को लेकर औद्योगिक थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर प्रकरण को जांच में लिया है।


हम समझ नहीं पा रहे क्यों उठाया कदम
मृतक के भतीजे राकेश मंडलोई ने बताया कि उनके अंकल प्रतिदिन खेत पर जाते थे। बुधवार को भी शाम करीब 5 बजे घर से खेत पर गए थे। शाम 7 बजे तक वह घर नहीं पहुंचे तो उन्हें खेत पर देखने आए थे। खेत पर पेड़ से लटका उनका शव मिला था। परिवार में सभी लोग यह समझ नहीं पा रहे है कि उन्होंने यह कदम क्यों उठाया। परिवार में उनका एक बेटा है, जो खेती करता है।


आंध्रप्रदेश में नौकरी करता था युवक
जितेंद्र जीजाजी भगवान सिंह देवड़ा ने बताया कि जितेंद्र अपने परिवार के साथ करीब 5 वर्ष पहले दुधलाई से देवास आकर काम कर रहा था। यहां शंकर नगर में किराए के मकान में रह रहे थे। वह वर्तमान में आंध्रप्रदेश की एक खाद बनाने वाली कंपनी में कार्यरत था। घर में उसकी पत्नी दो बच्चे और साला साथ में रहता है। बुधवार रात को सभी लोग बाहर वाले कमरे में सो रहे थे, वह कब रसोई घर में गए और कब फांसी लगा ली पता नहीं चला। आज सुबह उनकी पत्नी रसोई घर में गई तो वह फांसी के फंदे पर लटके हुए थे।

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