कलेक्ट्रेट की छत से कूदने लगी महिला : मीडिया साथियों व पुलिस ने बचाया…….! -जमीन पर कब्जे की शिकायत लेकर हाटपिपलिया से आए थे पति-पत्नी…….!-आवेदकों की समस्या का जल्द से जल्द निराकरण करेंगे : कलेक्टर

देवास। कलेक्टर कार्यालय में आज जनसुनवाई में हाटपिपलिया तहसील के आवेदक पति-पत्नी आए उनका कहना था कि उनकी पट्टे की जमीन किसी और को फर्जी तरीके से दे दी गई है। वे कई महीनों से कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दे रहे हैं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हुई। आज जब कलेक्टर ने आवेदन लेकर उन्हें वहां से रवाना कर दिया उसके बाद पति-पत्नी कलेक्टर की जनसुनवाई से नाराज होकर कलेक्टर कार्यालय की छत पर पहुंचे जहां महिला छत से कूद ही रही थी कि मौजूद मीडिया साथी और पुलिसकर्मियों ने उसे बचा लिया। उसे समझाकर नीचे लाए जहां महिला ने कहा कि अगर आगे भी कोई सुनवाई नहीं हुई तो वह आत्मदाह जैसा कदम उठाएगी। इस मामले को कलेक्टर ने पूरी तरह से समझा उसके बाद कलेक्टर ने कहा कि इनकी समस्या का जल्द ही समाधान करेंगे।


आज जनसुनवाई में जिले के हाटपिपलिया से आए आवेदकर धर्मेंद्र बागरी और उनकी पत्नी आशा कलेक्टर से मिले जहां उन्होनें अपने पट्टे संबंधित दस्तावेज उन्हें बताए, कलेक्टर ने दस्तावेज देखने के बाद आवेदन लेकर उन्हें वहां से जाने को कहा, दोनों पति-पत्नी जनसुनवाई कक्ष से बाहर आए जहां महिला आशा सुनवाई ना होने पर छत से कूदने के लिए दौड़ गई। छत पर वह कूदने लगी इसी बीच मौके पर मौजूद मीडिया साथी और पुलिसकर्मियों ने उसे कूदने से बचा लिया। आशा व उसके पति धर्मेंद्र ने बताया कि उनकी जमीन को फर्जी तरीके से इधर-उधर कर दिया है, इस मामले में वह लंबे समय से शिकायत कर रहे किंतु उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होनें चेतावनी दी कि यदी उनकी सुनवाई नहीं हुई तो वो आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगे। आवेदक धर्मेंद्र बताया कि पिछले दिनों शिकायतकर्ता रमेशचंद्र ने कलेक्टर को आवेदन देते हुए बताया कि उनकी भूमि सर्वे नंबर 1037/1 रकबा 1.8090 हेक्टेयर से उनका नाम त्रुटिवश हटा दिया गया है। इस मामले में उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की थी। कलेक्टर कार्यालय में टीएल पत्र क्रमांक 506534, 25 मार्च को भी मामला दर्ज है।


इस प्रकरण में जांच जारी है
कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि यह हाटपिपलिया तहसील का बहुत ही पुराना और पेचिदा मामला है, जिसमें आवेदक को वर्ष 1960 के आसपास एक पट्टा जारी किया गया था। उनके द्वारा उस पर काबिज नहीं रहा गया। उसी खसरे नंबर पर आईटीआई का निर्माण करीब 30 वर्ष पूर्व किया गया है। आज यह आवेदकगण उस खसरा नंबर पर पट्टे का क्लेम कर रहे हैं। उस संबंध में पूर्व में निर्देश जारी किए गए थे इसमें जांच की गई है। तहसीलदार द्वारा जांच करने के उपरांत एसडीएम को प्रकरण दिया गया था। इस प्रकरण में फिलहाल सुनवाई चल रही है। इनके द्वारा जो पट्टा रहा उस पर ये कभी काबिज नहीं रहे हैं। किंतु इनका पट्टा है जिस पर आईटीआई बन गया है। आवेदकों का किस प्रकार से समाधान किया जा सकता है इस पर विचार किया जा रहा है। आगे जल्द से जल्द निराकरण करेंगे।

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